Tuesday, November 24, 2020

समय के अंतराळ में टिमटिमाती ज़िन्दगी / growing and weakening life with time

 समय के अंतराळ में  टिमटिमाती ज़िन्दगी / growing and weakening life with time 


             जिंदगी हमारी जिंदगी या तुम्हारी जिंदगी शुक्राणु - अण्डा के मिलन से अन्तिम श्वास पर्यन्त पल पल असमंजस से भरी है। क्या मैं क्या तुम सबने इसी प्रक्रिया से गुजरना है कोई अन्य रास्ता दुनिया के रचना कार ने न बनाया न कोई उपाय सुझाया। फिर भी मानव जी हाँ जीव जगत का सर्वाधिक विकसित शरीर व् दिमाग वाला मानव। जबसे प्रगट हुआ है इस प्रक्रिया से बचने की जुगत व् कुछ कुछ जुगाड़ में लगा हुआ है। उसने अनेकों तरीके खोज निकाले व् इस अहंकार से भरा इस दुनिया में विचरण करता रहा कि अब उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता इस दम्भ के चलते उसने सृष्टि के रचनाकार को ही चुनौती दे डाली। लेकिन विधना के आगे एक न चली।  ये एक ऐसी व्यवस्था है उस मालिक की के किसी भी सामाजिक परिवेश का मनुष्य हो [ शिक्षित- अशिक्षित, अमीर- गरीब , ६ इन्च का या १२ फुट का ब्रह्माण्ड के किसी भी भूभाग का प्राणी हो।  सब बेकार। सभी को ४ अवस्थाओं में से होकर गुजरना पड़ेगा उसके बाद जय राम जी की।  

                ये एक अकाट्य सत्य सब जानते हैं , जो चले गए , जो हैं और जो जाने वाले है।  फिर भी मानते नहीं। कोई विरला ही इस प्रकल्प को मान्यता देता है , अपने आगे पीछे की पीढीयों को समझता व् सम्मान देता है। किसी को कुछ बताने की सीखने सिखाने की आवश्यकता नहीं।  वो स्वयं के विवेक से संज्ञान से देखता सुनता सीखता रहता है , लेकिन मानता कोई विरला ही है निभाता कोई विशेष ही है। 

                मैं समूह के संचालक  सम्पादक महोदय / महोदया का आभार प्रगट करता हूँ उन्होंने इस अतिविशिष्ट समस्या को उठाया इस पर हमारे  संस्मरण  विचार आदि अपने समूह के माध्यम से मांगे।  

              मैं यहां गुजरात के एक परिवार का अपना संस्मरण रखता हूँ।  मैं उसी सोसइटी में २ माह के लिए रहता था।  एक दिन सुबह सुबह पोलिस साईरन की आवाज अपने सोसाइटी के कंपाउंड में सुन अचंभित सा घर से बाहर जो निकला तो झटका लगा के सामने के ब्लॉक के पार्किंग लौट के सामने कोई सड़क पे पड़ा है और पोलिस व् फॉरेंसिक विभाग के अधिकारी इन्वेस्टीगेशन व् सैंपल, फोटो आदि लेने  में व्यस्त हैं लोगों में दबी जुबान से खुसर फुसर चल रही , छोटे २ समूह में लोग एक दूसरे से ज्ञान का आदान प्रदान कर रहे हैं RWA के पदाधिकारी अपनी अतिविशेष भूमिका को निभा कर अपने दायित्व का निर्बहन कर रहे हैं।  

                      सड़क पे पड़ा मानव एक महिला है उसकी पहचान "" **** "" की माता जी के रूप में हो चुकी है।  [ "जिनको १ माह पहले वृद्धाश्रम से एक सामाजिक संस्था के दबाब के चलते मजबूरी में घर लाया गया था" ]  

                    पोलिस अफसर उनको / परिवार को  अलग से अपने घेरे में लेकर पूंछताछ करने लगी है।  

                मेरे अब तक के विवरण से आप सब समझ गए होंगे कि क्या हुआ फिर भी संक्षेप में।  एक बुजुर्ग महिला ७५ साल उम्र अपने ७ फ्लोर स्थित घर की बालकनी से नीचे गिरी व् इस दुर्घटना ? [ खुलासा बाद में ]  उनका स्वर्गवास हो गया। 

                    पोलिस अपनी कार्यवाही करके चली गई।  परिवार को सख़्त हिदायत दी गई आप हमसे पूछे बिना शहर से बाहर नहीं जाएंगे।  गेट पे एक पोलिस अफसर बिठा दिया गया। सी सी कैमरा फुटेज ले ली गई। 

                    ३ दिन बाद उन माता जी के लड़के व् बहु को अरेस्ट कर लिया गया।  

                    इस सम्पूर्ण संस्मरण का निचोड़ था आज कल संतान अपने बुजुर्ग माता पिता या अन्य रिश्तेदारों को झेलने से साफ़ कन्नी काट रही।  अपनी संकुचित परिवार प्रणाली में सीमित है [ ये इसलिए लिखा क्योकि प्यार तो मर ही गया सम्मान की तो आप भूल ही जाएं। 

                    खुलासा -  सी सी कैमरा फुटेज में साफ़ साफ़  माता जी के  बहु व् लड़का उनको अपनी बालकनी की ४ फुट की रेलिंग से गिराते हुए दिखाई दे रहे थे।    

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