दर्द की बात चले और आंसूओं का जिक्र न हो बड़ा अजीब लगता है, कागज़ और पेन के अभाव में तेरी अंगुली और , मेरा दिल खतोकिताबत का एक मुक्कमल सामान हो सकता है ---एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त
Aश्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी
समप्रभा
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
Shree Vakratunda Mahakaya Suryakoti
Samaprabha
Nirvighnam Kuru Me Deva Sarva-Kaaryeshu Sarvada॥dd caption