Thursday, December 17, 2020

प्रकृति मै और मेरा साहित्य

प्रकृति मै और मेरा साहित्य - संकलित सह्भागिता 

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1 time slot - 4 se 8 ke beech kal 17 dec

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admin - bss / ns/ 

माध्यम- भारतीय साहित्य संगम--- व ----- - / नारी शक्ति - समूह  

संपादकीय - डा० अरुण कुमार शास्त्री 

सेल्फी स्थान व प्रष्ठ भूमि - उद्यान - टीपू सुलतान का मकबरा व लाईब्रेरी - मैसूर  

            रचना - - 
आसमां है - जमी है , मै हूँ - मौसम भी है 
कुदरत की सब नेमते हैं 
वक्त है , मौका है , नजाकत है 
सामाजिक परिवेश की अदावत है 
भावनाये है - शब्द है - राग है 
प्रकृति का अद्भुत अनुराग है 
हे सखी - मगर तुम कहां हो 
ये तो बहुत खेद की बात है // 
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प्रस्तुती - गीता ठाकुर दिल्ली 

 



१७/१२/२०२०    विषय *प्रकृति🌳🌻🌿

    ये सेलफी आज सवेरे मेरे अपने ही घर की है। जैसे ही धूप निकली और बाहर जाकर देखा, सच में मन बहुत खुश हुआ ये देख कर, गुनगुनी धूप और भी खुश नुमा लग रही थी। जल्दी से सेल्फी पोज लिया ताकि याद रहे। ये है हमारी प्रकृति। एक बीज से इतना सब कुछ देती है। 

    प्रकृति की हर चीज में अदभुत खज़ाना छिपा हुआ है। उसको अपने ह्रदय स्तर से समझने की बात है। प्रकृति को कभी भी अपनी सम्पदा का घमंड नहीं होता। सिर्फ इंसान ही है कि उसे ज्लदी से घमंड हो जाता है।

    ये कौन चित्रकार है, जिसने सारे पेड़ पौधे, फल, फूल बनाएं। सबको एक ही ऊंचाई दी।

    प्रकृति हमारी उत्कृष्ट शिक्षक है। प्रकृति को हम किताबों से नहीं पड़ सकते। इसके साथ रहने से, महसूस करने से समझ सकते हैं। एक तम्बाकू कि पैदावार करने वाला करोड़ों रुपए कमा सकता है जो किसान अन्न देने वाला अन्नदाता है वो गरीब है। उन्हें आत्महत्या करनी पड़ती है। समझ नहीं आता कि ये देश आगे जा रहा है या पीछे जा रहा है। अंत में मैं यही कहना चाहूंगी कि यदि आप और हम सभी प्रकृति में सुंदरता देख पाते हैं तो निश्चित ही आप प्रकृति के नज़दीक हैं ।

    प्रकृति से प्रेम करिए, ये भी आपके सौ गुना अधिक प्रेम करेगी। धन्यवाद महोदय जी 🙏

     गीता ठाकुर दिल्ली से 🙏  🌸🌿🌻🍀🌳🍁☘️🎋🍂🥀🌹🌷🍥🍥👏🏻

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श्रीमती गायत्री ठाकुर "सक्षम"  नरसिंहपुर ,मध्य प्रदेश



मैं श्रीमती गायत्री ठाकुर "सक्षम", नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश से आज दिनांक 17 दिसंबर सेल्फी प्रतियोगिता के लिए अपनी  सेल्फी प्रेषित कर रही हूं। मेरे पीछे एक घना आम्र वृक्ष है उससे संबंधित मेरे विचार एक कविता के माध्यम से प्रस्तुत हैं,

 जो कि निम्नांकित हैं–– 

यह आम्र वृक्ष है कितना प्यारा,

देता सुकून मुझे कितना सारा।

 जब चलती इसकी ठंडी बयार,

 दिल में उठता एक नया खुमार।

 जब आता है बसंत भीनी खुशबू,

 फैल जाती है पूरे  घर आंगन में।

 महक जाती है पूरी बगिया मेरी,

कोयल कुहकने लगती अमराई  में।

 सुनकर उसकी कुहुक मेरा मन भी,

 खुशियों से भरकर गाने लगता है ।

वातावरण सुरभित होकर "सक्षम",

 सर्वत्र  उल्हास बिखेरने लगता है।

श्रीमती गायत्री ठाकुर "सक्षम"   नरसिंहपुर ,मध्य प्रदेश

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    🌹मधु वैष्णव "मान्या" 🌹 विधा मुक्त रचना,जोधपुर, राजस्थान


जैसे ही इंटरनेट  ऑन किया सबसे पहले  यही पटल खुला और कोइंसिडेंसली आज ही मैंने अपने बगीचे के सारे फूल इकट्ठे किए थे अपनी पोट में तो इच्छा हुई कि मैं एक सेल्फी लूं और आज आपने वही पॉइंट रखा तो मुझे बहुत अच्छा लगा,,,,,,❤️❤️

🌹 पुष्प 🌹

उम्मीदों की दहलीज पर,

 अक्सर खिलते,

अभिलाषाओं के पुष्प,,,,,,।

मृगतृष्णा की राह में,

ढेर सवालों का,

जिंदगी के रंगमंच पर,

खिलते किरदारों के पुष्प।

करती रहूं दुआ ,

कुछ ऐसी मैं,

 श्रद्धा और संस्कृति,

 की राहों में,

 खिलते रहे रस्मो रिवाज के पुष्प।

 मधु,,,मन की उर्वर,

 अवनि पर,

होते रहे प्रस्फुटित ,

अमित जीवन के पुष्प।

    🌹मधु वैष्णव "मान्या" 🌹 विधा मुक्त रचना,जोधपुर, राजस्थान

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शीला सिंह ,  बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏


हे प्रकृति !  जीवन दायिनी 
मानव  चिर  संगिनी  है  तू,
प्रेरणादायिनी इस जग की
नियामक और भविष्य द्रष्टा,
बंधन सारणी प्रेषिणी  नित
जीवंतता पालक पोषक है तू। 

कोमल कोंपल निज तन शोभाए
भिन्न रंग पुष्प पर्ण डाल सजाए 
शीतल नीर संग शान्त सहजता
मन्द समीर मन प्रफुल्ल समाए
ऊंचे शैल रजत हिम ओढ़नी
स्वर्ण रश्मि दिवाकर आ फैलाये। 

शीला सिंह
 बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏

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