बचपन यही कोई 8-9 साल का रहा होगा में ।
हमारी हीरो हौंडा बाइक पे टोंक शहर से माँ के दर्शन के लिए जाया करते थे ।
मुझे आज भी याद है ,में बाइक पे आगे बैठा करता था,
माँ के दर्शन की उत्सुकता इतनी होती थी ,की
नंगे पैर ,धुप में सीढ़िया पे इतनी तेजी से चढ़ जाता था ।
परिवार वाले पीछे रह जाते थे।
आज जब में दोस्तों के साथ था तो मुझे ये सौभाग्य फिर से मिला
जिससे भक्तो को ऊपर तक जाने में दिक्कत नही आती।
माँ ने जो बुलाया था ।


