Saturday, April 8, 2017

अरजी_arjee

drarunkumarshastri/ एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त 

खुदा से कुछ समय मांगा है 
मेरी अर्ज forward कर देना 
दो चार दिन हुं दुनिया में 
तब तलक मेरी सारी खताये 
मुआफ कर देना 
जुदा न हो जाना 
बीच सफर में 
एय मेरे प्यारे दोस्त 
बहुत जालिम है ये जमाना 
तुम भरी भीड में मेरा हांथ 
कस के थामे रखना 
छोड के जाऊ जिस दिन दुनिया को 
बस उसी पल 
अपनी स्लेट से 
इस नामुराद का नाम 
साफ कर देना 
 




















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