मैं और मेरी तन्हाई / main aur meri tanhai
Saturday, November 14, 2015
दर्द की बात चले और आंसूओं का जिक्र न हो
बड़ा अजीब लगता है,
कागज़ और पेन के अभाव में तेरी अंगुली और , मेरा दिल
खतोकिताबत का एक मुक्कमल सामान हो सकता है ---एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment